साधना पथ भाग 208
देव मणि शुक्ल
आज की खबर
पारिवारिक समस्याओं के लिए कुछ अनुभूत टोटके
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मेरे आत्मीय गुरु भाई बहनों एवं प्रबुद्ध मित्रों मैंने
पिछली पोस्ट में कुछ छोटे छोटे मंत्र जप प्रयोग और एक दिवसीय एक माला ग्यारह माला मंत्र जप जैसे प्रयोग आपको देकर आपकी मनोवांछित कामनाओं में सफलता प्राप्त हो आप साधनाओं के क्षेत्र में गुरु सानिध्य प्राप्त कर आगे बढ़ सकें,ऐसा करने के बाद।कुछ हमारी गृहस्थ गृहणी साधिकाओं बहनों ने आग्रह किया कि आप मंत्र जप माला फेरने की बड़ी बड़ी साधनाएं देते हो जो हम समयाभाव अथवा शारीरिक स्थूलता के कारण सम्भव एवं अनुकूल सम्पन्न नहीं कर पाते हैं कृपया आप हमें दैनिक जीवन में छोटी मोटी रोज मर्रा के लिए कुछ गुरु प्रदत्त अनुभूत प्रयोग टोटके प्रदान करें जो हमारी समस्याओं का समाधान करने में सक्षम हो सकें।उनके अनुरोध से एक बात तो मुझे भी समझ आती है ।कि बहुत से परिवार ऐसे हैं जिसमें पति साधक है लेकिन पत्नी सहयोग नहीं करती कहीं पर पत्नी साधना करती है पति घोर विरोधी है कहीं पर दोनों साधक हैं लेकिन उनके मां बाप ,सांस ससुर अड़ंगा लगाए हुए हैं कहीं किराए का मकान तो मकान मालिक हवन नहीं करने दे रहा और कहीं पूरे घर में एक ही कमरा पूरे परिवार के लिए ।अब गृहस्थ साधक अपने परिवार की खुशहाली के लिए साधना गुरु मंत्र सामग्री का सहारा लेकर समस्याओं के समाधान हेतु प्रयत्न रत है उन्हीं के कल्याण केलिए गुरु इष्ट देवी देवताओं को मना रहे है और वही उनके लिए बाधक भी बन रहे हैं यह भी उन गृहणियों , साधक साधिकाओं के लिए एक समस्या ही है अर्थात समस्याओं के समाधान में भी एक ज्वलंत समस्या आखिर छोटा सा जीवन, किस किस से लड़ें अपने से लड़ें ,अपनों से लड़ें अड़ोस पड़ोस ,गली मुहल्ले,गांव शहर या अपनी पारिवारिक सामाजिक जिम्मेदारियों से लड़ें और ज़िन्दगी तो मुट्ठी की रेत की तरह जितना कस कर पकड़ने का प्रयत्न करते हैं उतनी तेजी से फिसलती जाती है । लेकिन इन सबके बावजूद भी जिन्दगी में सुकर्म प्रयत्न ,साहस आशा और धैर्य के साथ साधना रूपी नाव में बैठकर गुरु रूपी पतवार लेकर जो इस संसार रूपी भवसागर को मुस्कुराते हुए पार कर जाते हैं वहीं वास्तव में श्रेष्ठ शिष्य साधक और महापुरुषों के नाम से जानेजाते हैं ,सराहे जाते हैं ।इसी कड़ी में मैं आज आपको कुछ अनुभूत ,अचूक औरप्रभावी प्रयोग देने जा रहा हूं जो दिखने में तो बहुत ही साधारण से हैं लेकिन आपके समस्या समाधान के लिए हनुमान जी की गदा के समान प्रहारक हैं ।इनमें किसी प्रकार के मंत्र जप विधान की आवश्यकता नहीं होती है । केवल गोपनीय तरीके से चुपचाप इन्हें करने की आवश्यकता होती है ।
छोटे बच्चों की नजर उतारने का प्रयोग
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छोटे चंचल बच्चों को नजर लगना एक आम बात है
नजर लगने पर बच्चे की आंखों की पलकों के बाल जिन्हें हम बिन्नी भी कहते हैं एकदम सीधे खड़े हो जाते है ।जबकि सामान्य अवस्था में पलकों के बाल ऊपर की ओर मुड़े हुए रहते हैं यह नजर की महत्वपूर्ण पहचान है ऐसी स्थिति में आप गाय के गोबर का सूखा उपला लेकर गैस की लौ में उसे जलाकर तवे पर रख लें तत्पश्चात एक मुट्ठी चोकर (गेहूं के आटे की छनी भूसी)तीन छोटे टुकड़े लाल मिर्च व एक चुटकी नमक लेकर दाहिने हाथ की मुट्ठी में रखकर बच्चे के ऊपर से सात बार बाएं से दाएं वार कर उस जलते हुए उपले पर डाल दें यदि नजर है तो कितनी ही मिर्ची तीखी क्यों न हों आपकोधुंए में गंध नहीं आएगी यह मेरा अचूक आजमाया हुआ प्रयोग है ।
आकस्मिक धन प्राप्ति प्रयोग
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किसी शुक्रवार के दिन दोपहर अथवा मध्य रात्रि में
एक मिट्टी के कोरे बर्तन में एक मधु रूपेड़ एकमुखी रुद्राक्ष,एक पाव पक्की मिठाई ,सात लाल मिर्च और सात डली खड़ा नमक तथा एक लोटा जल लेकर किसी तिराहे पर (जहां पर तीन रास्ते एक साथ आकर मिलते हों) उसके बीचोबीच वह हांडी रखकर लोटे के जल से उसके चारों ओर पानी का घेरा बना दें तत्पश्चात खाली लोटा लेकर वापिस घर की तरफ मुड़ कर सीधे आ जाएं यानि पीछे मुड़कर नहीं देखना है।ऐसा करने से साधक को किसी न किसी प्रकार से अगले दिन से धन का रास्ता निकालना प्रारंभ हो ही जाता है उसकी उन्नति प्रारंभ होने लगती है ।
इच्छा सिद्धि प्रयोग:
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प्रातः बिस्तर पर उठकर बैठ जाएं और दोनों हाथों की कनिष्ठिका अंगुलियों को आपस में मिलाकर दर्पण की तरह हाथ की गदेलियों को देखते हुए निम्न मंत्र का एकबार उच्चारण करें ।
।। कराग्रे वस्ते लक्ष्मी,कर मध्येस्तु सरस्वती
करतलेतु सद्गुरु देव, प्रातः कर दर्शनम।।
तत्पश्चात नासिका का जो स्वर चल रहा हो उसी हाथ कीहथेली को अपने मुंह पर रखकर उसी तरफ का पैर विस्तर से पहले भूमि पर रखें ,ऐसा करने से निश्चितही आपके इच्छित कार्य की सिद्धि होती ही है इसमें कोई संशय नहीं है ।कहते हैं ----हाथ कंगन को आरसी क्या? पढ़ें लिखे को फारसी क्या?
विद्वेषण प्रयोग
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आपसी कलह एवं लड़ाई झगड़ा करवाने वाला प्रयोग हृलांकि इस तरह के प्रयोगों का मैं पक्षधर नहीं हूं लेकिन कुछ साधकों की समस्याओं को ध्यान में रखकर मैं यह प्रयोग दे रहा हूं इस प्रयोग को मुख्यत: ऐसी स्थिति में सम्पन्न करना होता है जहां पर शत्रु हावी हो , रसूखदार हो प्रत्येक दृष्टि से सामाजिक पारिवारिक जीवन में कुछ न कुछ बयवधान उत्पन्न कर जीवन को अस्त व्यस्त करने में कोई कोर कसर बाकी नहीं रख रहा हो तो किसी मंगलवार के दिन एक काले कपड़े का छोटा टुकड़ा तथा पांच हकीक पत्थर जेब में रखकर घर से निकलकर शम्शान पहुंचे वहां से एक मानव अस्थि (हड्डी का छोटा टुकड़ा)लेकर उसी कपड़े में हकीक पत्थर सहित कसकर बांध लें तत्पश्चात किसी भी समय तक उस पोटली को शत्रु के घर में किसी भी स्थान पर फेंक कर या रख कर आना है ध्यान रहे उस पोटली को शम्शान से वापस आपको अपने घर नहीं लाना है तथा अति गोपनीय तरीके से सम्पन्न करना है यहां तक कि अपने घर के किसी सदस्य से कितना भी अंतरंग हो नहीं बतलाना है ।इस प्रयोग को सम्पादित करते ही शत्रु अपनी घरेलू उलझनों में उलझकर आपका पीछा छोड़ देगा और आपका अभीष्ट कार्य सिद्धि हो जायेगा ।
संतानोत्पत्ति प्रयोग
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जिन साधकों को संतान प्राप्ति की इच्छा हो या जिनके संतान प्राप्ति नहीं हो पा रही है अथवा इच्छित संतान प्राप्ति की कामना करते हैं वे साधक यह एक छोटा सा अचूक प्रयोग अवश्य सम्पन्न करें यह एक यंत्र उत्कीर्ण प्रयोग है ।किसी भी रविवार को प्रातः काल बड़ के पेड़ से (बड़ एक प्रकार का फल होता है जो पीले रंग का बदसूरत टेड़ा मेंढ़ा विकृति आकृति वाला होता है )एक हजार पत्ते तोड़ लाएं अथवा कहीं से भी प्राप्त कर पहले से रख लें ।किसी भी रविवार के दिन कुंकुम को पानी में घोलकर स्याही बनावें तथा चांदी की शलाका (तार)से किसी लकड़ी के बाजोट (चौकी) पर रखकर एक हजार बड़ के पत्तों पर एक हजार बार यंत्र को उत्कीर्ण कर उनके सामने दीपक धूप लगाकर विधिवत प्रार्थना करते हुए संतानोत्पत्ति की कामना करें तत्पश्चात किसी लाल वस्त्र में पत्तों को बांधकर किसी संदूक में सुरक्षित रख दें तथा इस प्रकार प्रत्येक रविवार को पोटली संदूक से निकाल कर धूप दीप के साथ पूजन कर सन्तानोपत्ति की याचनाकर पुनः संदूक में रखें ऐसा करने से साधक शीघ्र ही सन्तान की प्राप्ति होती ही है।
जय गुरुदेव
जवाब देंहटाएंJai guru dev
जवाब देंहटाएंAti uttam
जवाब देंहटाएंVery nice
जवाब देंहटाएंअति सुंदर जानकारी
जवाब देंहटाएंविश्वनाथ त्रिपाठी
धन्यवाद
जवाब देंहटाएंअति सुंदर जानकारी।आपकी लेखनी को बारम्बार प्रणांम 🙏🙏
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