साधना पथ भाग 216


 देव मणि शुक्ल 
आज की खबर 

 साधकों धन और सुख इन दोनों में बहुत अंतर है। प्रायः लोग इन दोनों का अंतर नहीं समझते। वे समझते हैं कि "जिस के पास धन अधिक है, वही सुखी है।" 
   साधकों  ऐसा नहीं है। यदि ऐसा होता तो बड़े-बड़े अरबपति खरबपति धनवान सेठ, सब के सब सुखी होते। "वे लोग धनवान तो हैं, परंतु सुखी नहीं हैं। क्योंकि धन से भूमि भवन मोटर गाड़ी सोना चांदी आदि भौतिक वस्तुएं तो खरीदी जा सकती हैं, सुख नहीं।" सुख तो मन का विषय है, जो कि वेदों की सत्य विद्या और पुण्य कर्मों से मिलता है। "इसलिए उन सेठों के पास भौतिक वस्तुएं बहुत होते हुए भी, वे सुखी नहीं हैं।"
          बड़े-बड़े सेठ बहुत धन वाले होते हुए भी, हर समय तनाव में रहते हैं। उनको बीसियों प्रकार की चिंताएं लगी रहती हैं। "राग द्वेष काम क्रोध लोभ अभिमान आदि अनेक समस्याओं से दिनभर घिरे रहते हैं। इन सब के कारण जो उनके मन में तनाव और दुख उत्पन्न होता है, वह धन से प्राप्त होने वाले सुख को भी दबा देता है।" परिणाम यह होता है, कि वे धन से प्राप्त होने वाले सुख को भी ठीक प्रकार से नहीं भोग पाते। "जिनके पास आवश्यकता पूर्ति जितना धन और खाने पीने को, रहने को आवश्यक साधन पूरे होते हैं। वही लोग अधिक से अधिक सुखी हैं।" और जिनके पास खाने पीने जीने के साधन भी पूरे नहीं हैं, वे भी दुखी हैं।  
           "प्राचीन काल के ऋषि-मुनियों का जीवन आप देखिए। बहुत थोड़े साधनों में बहुत थोड़े धन संपत्ति में वे बड़े प्रसन्न सुखी और आनंदित रहते थे।" क्या कारण था? "उनके पास वेदों की विद्या थी, साधना थी, तपस्या थी, उत्तम आचरण था। इन कारणों से वे सुखी थे।" "आज भी यदि कोई सुखी होना चाहे, तो इन्हीं साधनों से सुखी हो पाएगा। इसलिए इन्हीं साधनों को अपनाएं। धन के पीछे अधिक न भागें। जीवन रक्षा के लिए जितना आवश्यक हो, उतना धन अवश्य कमाएं। ईमानदारी और बुद्धिमत्ता और परिश्रम से धन कमाएं।"
       "आजकल लोग झूठ छल कपट धोखा बेईमानी इत्यादि से धन तो कमा लेते हैं। परंतु उनको सुख नहीं मिलता। वे सदा दुखी ही रहते हैं।" "सच्चे व्यक्ति को लोग धोखा बहुत देते हैं, उसे लूट लेते हैं, उसे अनेक प्रकार से अपमानित करते हैं। इन कारणों से वह सच्चा व्यक्ति भले ही कम धन संपत्ति वाला हो, फिर भी वह ईश्वर आज्ञा पालन करते हुए सदा सुखी रहता है।"    
        "अतः ईश्वर की भक्ति करें। वेदों का ज्ञान परोपकार सेवा दान दया आदि गुणों को धारण करके ईमानदारी बुद्धिमत्ता और परिश्रम से जीवन को जिएं। आपको जीवन में सदा आनंद रहेगा।

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