गुबार में तब्दील सुपरटेक का गुमान
देव मणि शुक्ल
ब्यूरो प्रभारी
आज की खबर
नोएडा वह एक ऐसा धमाका था, जिसने आसमान से धरती को निहारने के हसीन ख्वाब को पलक झपकते ही मिट्टी में मिला दिया। भ्रष्टाचार की बुनियाद पर खड़े होकर गगन से बात करते ट्विन टॉवरों का गुमान बारूद के साथ धुआं बनकर फिजाओं में गुम हो गया। दोनों टॉवरों को ध्वस्त करने के लिए 3,700 किलोग्राम विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया। धमाके से आसपास की सोसायटियों के कई घरों की खिड़कियों के शीशे टूट गए। गगनचुंबी इमारतों के गिरते ही लगा, जैसे भूकंप आ गया। तेज आवाज और धूल के गुबार को देखकर एक बारगी महसूस हुआ, जैसे पूरा इलाका ही मिट्टी में मिल गया।
ट्विन टॉवरों को गिराना इतना आसान नहीं था। इसके लिए लगभग छह महीने तक गहन रिसर्च किया गया। इसमें आईआईटी चेन्नई के विशेषज्ञों के साथ एडिफिस कंपनी और साउथ अफ्रीका की जेट डिमॉलिशन प्राइवेट लिमिटेड की टीमों ने दिनों रात मेहनत की। शुरुआती दिनों में मॉक ड्रिल के बाद एडिफिस कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट से डिमॉलिशन के लिए और वक्त की मांग की थी। टीम को भी यह महसूस हो गया था कि वह इस काम को जितना आसान मान रहे थे, उतना है नहीं। विस्तृत अध्ययन के बाद विशेषज्ञों ने दोनों टॉवरों को सुरक्षित गिराने के लिए अतिरिक्त विस्फोटकों का इस्तेमाल करने का फैसला किया।
आखिर, दक्षिण अफ्रीका की जेट डिमॉलिशन प्राइवेट लिमिटेड, भारत की एडिफिस कंपनी और आईआईटी चेन्नई के विशेषज्ञों के इम्तिहान का वक्त आ गया। साउथ अफ्रीका की जेट डिमॉलिशन प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर जो बिक्समैन, आईआईटी चेन्नई के विशेषज्ञ और भारत की एडिफिस कंपनी के इंडियन ब्लॉस्टर चेतन दत्ता, प्रोजेक्स इंजीनियर मयूर मेहता और उत्कर्ष मेहता की धड़कनें बढ़ गई थीं। 28 अगस्त-2022, दिन रविवार को घड़ी की सूई जैसे दोपहर दो बजकर 30 मिनट पर पहुंची, एक सायरन बजा। एडिफिस के इंडियन ब्लास्टर चेतन दत्ता ने रिमोट का बटन दबाया। फिर तीन सेकेंड के भीतर दो जोरदार धमाके हुए। भ्रष्टाचार का ‘रावण’ जमीन पर आ गिरा और गगन से बात कर रही दो इमारतें को धरती ने अपने आगोश में ले लिया।
नोएडा के सियान और एपेक्स टावर में विस्फोट के दौरान प्राइमरी और सेकेंडरी विस्फोट के बीच तीन सेकेंड का अंतर था। विस्फोट के 9 सेकेंड के भीतर दोनों टावर मलबे में तब्दील हो गए। ट्विन टावरों के जमीन पर गिरने के साथ ही धूल के गुबार ने आसमान को छूने की कोशिश की। उसे लगभग 10 किलोमीटर दूर तक देखा गया। धूल से बचाने के लिए आसपास के सोसायटी को प्लास्टिक की शीट से कवर किया गया था। सेक्टर-93 ए स्थित एमराल्ड कोर्ट व एटीएस विलेज सोसायटी में रहने वाले लोगों को अपने वाहनों के साथ परिसर को सुबह 7 बजे ही खाली करा दिया गया था।
सुरक्षा के लिए एक्सप्लोजन जोन में 560 पुलिसकर्मी, रिजर्व फोर्स के 100 जवान और चार क्विक रिस्पांस टीम के अलावा एनडीआरएफ टीम को तैनात किया गया था। दोपहर 2.15 बजे एक्सप्रेस-वे को बंद कर दिया गया। आधे घंटे बीतने और धूल हटने के बाद इसे चालू किया गया। इसके अलावा पांच और रास्तों को बैरिकेड लगाकर बंद किया गया था।
डिमॉलिशन के मद्देनजर ट्विन टावर के पास की दो सोसायटी में रसोई गैस और बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई थी। धूल के नुकसान से आम लोगों को बचाने के लिए 15 स्मॉग गन लगाई गई थी। हवा में प्रदूषण मापने के लिए छह एयर क्वालिटी इंडेक्स मशीनें लगाई गईं थीं। इसके अलावा किसी अप्रिय घटना से निपटने के लिए शहर के छह हॉस्पिटल को स्टैंड बाय पर रखा गया था। किसी आपातकाल के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाए गए थे। मौके पर एम्बुलेंस की भी तैनाती की गई थी। नोएडा के ट्विन टावर के ध्वस्तीकरण पर जिला प्रशासन भी अलर्ट मोड पर रहा। खुद डीएम सुहास एलवाई और ज्वाइंट कमिश्नर लव कुमार मौके पर मौजूद थे।
ट्विन टावर्स को गिराने में लगभग 18 करोड़ रुपये का खर्च आया है। ये खर्च भी सुपरटेक को ही उठाना है। इसके पहले कुल 950 फ्लैट्स के इन दो टावर्स को बनाने में सुपरटेक 200 से 300 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है। गिराने का आदेश जारी होने से पहले इन फ्लैट्स की मार्केट वैल्यू बढ़कर 700 से 800 करोड़ तक पहुंच चुकी थी। ये वैल्यू तब है, जबकि विवाद बढ़ने से इनकी वैल्यू कम हो गई थी। रियल एस्टेट के जानकारों का मानना है कि इस इलाके में 10 हजार रुपये प्रति वर्गफीट का रेट है। इस हिसाब से बिना किसी विवाद के इन टॉवर्स की बाजार कीमत 1000 करोड़ के पार निकल गई होती। सुपरटेक ने इस नुकसान से बचने की भरसक कोशिश की। कोर्ट में तमाम तरह की दलीलें दी थीं, जिसमें एक टावर गिराकर वहां दूसरे को खड़े रहने का विकल्प भी सुझाया था। लेकिन, सुप्रीम अदालत ने उसकी सभी दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया था।
Bahut Sundar
जवाब देंहटाएंसत्य की जीत हुई
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