पति पत्नी के समर्पण और प्रेम का प्रतीक है करवाचौथ
आज की खबर
देव मणि शुक्ल
आज पति-पत्नी के आपसी प्रेम और समर्पण का महापर्व करवा चौथ है। करवा चौथ के दिन बिना कुछ खाए-पीए निर्जला व्रत रखने का महत्व होता है। सुहागिन महिलाएं अपनी पति की लंबी आयु, सुखी जीवन, सौभाग्य और समृद्धि की कामना के लिए दिनभर उपवास रखते हुए रात के समय चंद्रमा के दर्शन कर व्रत तोड़ती हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार हर वर्ष कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर करवा चौथ का पर्व मनाया जाता है। यह सुहागिनों के सबसे बड़े त्योहार में से एक है। सुहागिनों के लिए करवा चौथ व्रत का इंतजार सालभर रहता है। जिसमें महिलाएं इस दिन 16 श्रृंगार करके पूरे दिन का व्रत रखती है। शाम को माता करवा की पूजा और कथा सुनती हैं फिर रात को चंद्रमा के निकलने पर अर्ध्य देते हुए पति के हाथों से पानी पीकर व्रत तोड़ती हैं।
इस वर्ष करवा चौथ का त्योहार बहुत ही शुभ योग और कई ग्रहों के शुभ संयोग में मनाया जाएगा। आज 13 अक्तूबर, गुरुवार को करवा चौथ है। और सभी ग्रहों में सबसे ज्यादा शुभ फल देने वाले गुरु ग्रह अपनी स्वयं की राशि में रहेंगे। ज्योतिष शास्त्र के जानकारों के मुताबिक ऐसा संयोग 46 वर्षों के बाद बन रहा है। इस तरह के इस बार करवा चौथ पर गुरु का प्रभाव सबसे ज्यादा रहेगा। यह संयोग सुख-समृद्धि और वैभव में वृद्धि करने वाला होगा। इसी के साथ सुहागिन महिलाओं के अखंड सौभाग्य और सुख-सुविधा के लिए शुभ फलदायी रहने वाला है। इसके अलावा करवा चौथ पर चंद्रमा और बुध ग्रह उच्च राशि में विराजमान होंगे। गुरु-शनि भी अपनी राशि में जबकि मंगल स्वयं के नक्षत्र में होंगे। बुधादित्य और महालक्ष्मी योग करवा चौथ की पूजा को सफल और मंगलकारी बनाएंगे।
जय ग़ुरूदेव।🙏🙏
जवाब देंहटाएंजय गुरुदेव
हटाएंअति उत्तम जानकारी 🙏
जवाब देंहटाएंजय हो
हटाएं🕉️🙏🙏🙏🙏🙏
जवाब देंहटाएं🙏🙏🙏
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