मांगी नाव न केवट आना कहइ तुम्हार मरमु मै जाना
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देव मणि शुक्ल
नोएडा जी टी करनाल रोड अली पुर थाना प्रचीन शिव मंदिर पर चल रही भव्य श्री राम कथा के सातवे दिन की कथा मे कथा व्यास अनंत श्री विभूषित महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 स्वामी पंचमानंद जी महाराज ने राम केवट संवाद की मार्मिक कथा सुनाते हुए कहा कि गंगा को पार करने के लिए भगवान श्री राम लखन एवं सीता सहित गंगा के किनारे खड़े होकर केवट से पार उतारने के लिए नाव मांगी तो केवट ने कहा कि मैं आपके मर्म को जानता हूं आपके चरणों कमलों की धूल के लिए सब कहते हैं कि मनुष्य बनाने वाली कोई जडी है। जिसके छूते ही पत्थर सुन्दर स्त्री बन गयी। मेरी नाव तो लकड़ी की है।अगर मेरी नाव स्त्री बन गयी तो मै बरबाद हो जाऊंगा। मेरी जिंदगी कैसै पार होगी।मेरी रोजी रोटी छिन जाऐगी।मै तो इसी के सहारे अपने परिवार का भरण पोषण करता हूँ। इसके अलावा कोई दूसरा सहारा नहीं है। यदि आपको पार जाना है तो पहले अपना चरण धुलवा लीजिये फिर आपको पार उतार दूगा।
कृपा सिंधु बोले मुसकाई ।
सोई करू जेहि तव नाँव न जाई।।
बेगि आनु जल पाय पखारू।
होत बिलंबु उतारहि पारू। ।
भगवान श्री राम मुस्कुराते हुए कहते हैं कि हे केवट राज जल लाइऐ और पैर धुलकर मुझे गंगा पार करा दीजिए।
उतरि ठाड़ भये सूर सरि रेता।
सीय राम गुह लखन समेता।।
निषादराज ने भगवान श्री राम को गंगा पार करा दिया। राम ने उतराई के रूप मे अंगूठी देने लगे तो केवट ने कहा कि आप हमारे घाट पर आए तो हम आपको गंगा पार करा दिया हू और जब मैं आपके घाट पर आऊ तो आप मुझे भवसागर से पार करा देना।हमारा आपका हिसाब बराबर हो जायेगा। तत्पश्चात आरती एवं प्रसाद वितरण किया गया। इस मौके पर दिनेश मान,
अंगद सिंह तोमर, संजय पाण्डेय, सी एल तिवारी, प्रमोद भारद्वाज, रवि राघव, रमेश चंद्र दास, रमेश वर्मा, राजेश कुमार गुप्ता, संगम प्रसाद मिश्र, हरि शंकर सिंह, गोरे लाल, धर्मेन्द्र कुमार सिंह, प्रदीप यादव,राम केश,राम प्रकास सिंह, अजय सिह, शिव चौधरी, रविन्द्र कुमार, प्रमोद सिह, प्रेम नारायण सिंह, दिनेश कुमार, अमितेश सिंह, उत्तम चंद्रा ,वृज किशोर, विवेक कुमार, कुन्दन सिंह, प्रान्जल शुक्ल, पीयूष शुक्ल, अंशुमान मिश्र, प्रियम,देवांश सिंह, अभिशेष पाण्डेय आदि गणमान्य लोग उपस्थित रहे हैं।
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