श्री शिव महापुराण में बिल्व पत्र, भस्म एवं रुद्राक्ष की महिमा का किया वर्णन
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देव मणि शुक्ल
नोएडा सेक्टर 82 स्थित प्राचीन तपोभूमि ब्रम्हचारी कुटी में आयोजित श्री शिव महापुराण एवं रुद्र महायज्ञ के दूसरे दिन कथा व्यास महेश पाठक शास्त्री जी महाराज ने शिव पर बिल्व पत्र चढ़ाने, भस्म लगाने ,रुद्राक्ष पहनने की महत्ता का वर्णन किया। व्यास जी ने बताया कि भगवान शिव पर बिल्वपत्र चढ़ाने से दैहिक, दैविक, भौतिक ताप का नाश होता है। बिल्वपत्र अर्पित करने से भोलेनाथ अत्यंत प्रसन्न होते है। शिव जी पर सौ बिल्वपत्र चढ़ाने और शिव महापुराण पर एक बिल्वपत्र चढ़ाने से बराबर पुण्य का लाभ मिलता है। जो मनुष्य शिव जी को नित्य बिल्वपत्र अर्पित करता है उसके सारे पापों का नाश हो जाता है और अंत में वह शिव के परम धाम को प्राप्त करता है । भष्म का तिलक लगाने पर जितने भष्म के कण होते हैं प्रत्येक कण एक शिव लिंग के समान होता है। उन्होंने सती के जन्म की कथा भी सुनाई । कथा के उपरांत आरती और प्रसाद का वितरण किया गया। यज्ञाचार्य मनोहर शास्त्री एवं उप यज्ञाचार्य सुमित तिवारी द्वारा सुबह वैदिक रीति से रुद्र यज्ञ कराया गया। आयोजन समिति के सदस्य राघवेंद्र दुबे ने बताया कि 24 अप्रैल को श्रीशिव महापुराण में सती जन्म आदि कथाओं का वर्णन किया जाएगा । सभी शिव भक्त रुद्र यज्ञ एवं शिव महापुराण की कथा श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित करें।
इस अवसर पर आयोजन समिति के सदस्य राघवेंद्र दुबे, कुटी व्यवस्थापक विकास भारती, मंगू त्यागी, फलाहारी महाराज, देवेंद्र गुप्ता , एन के सोलंकी, पंडित अखिल पांडेय, परदेशी, बाबा हलवाई, रवि राघव, संजय पांडेय, गोरे लाल, अमितेश कुमार सिंह,शिव व्रत तिवारी, पंकज झा,उत्तम चंद्रा, संतोष कुमार तिवारी, रमेश वर्मा सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
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