कानून के साथ खुल्लम-खुल्ला खिलवाड। बलात्कार व हत्या का ‘‘उम्रकैदी’’ बाबा राम रहीम, 11वीं बार आया जेल से बाहर
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देव मणि शुक्ल
सारी सुविधाओं से लैस है बरनावा आश्रम
गुरु राम रहीम के देश भर में अनेक आश्रम है। इन्हीं में से एक आश्रम उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के बरनावा कस्बे में स्थित है। इस आश्रम में राम रहीम के रहने टहलने के लिए सभी अत्याधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं। उनका निजी कक्ष किसी फाइव स्टार होटल से कम नहीं है। उनकी खास सेवा के लिए उनकी सबसे प्रिय शिष्य हनीप्रीत भी इसी आश्रम में मौजूद है। बाबा के खाने-पीने के लिए भी तमाम महंगे से महंगे व्यंजनों की व्यवस्था भी आश्रम में की गई है। कुल मिलाकर पिछली बार की तरह ही बलात्कार व हत्या जैसे गंभीर अपराध का दोषी राम रहीम अगले महीने तक अपनी ऐशगाह में मौज मस्ती करेगा। अपने ही आश्रम की शिष्या के साथ बलात्कार करने के मामले में 20 साल व छत्रपति व रणजीत की हत्या के मामले में भी उम्र कैद की सजा काट रहे राम रहीम को पैरोल के बहाने बार-बार मौज मस्ती के लिए जेल से बाहर भेजना पूरी कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। बाबा के कट्टर भक्तों को छोडक़र सभी का कहना है कि यह तो कानून के साथ खुल्लम खुल्ला खिलवाड़ है। इतने बड़े अपराधी को बार-बार जेल से बाहर जाने की अनुमति देना सरासर गलत है।
15 अगस्त को आश्रम में ही मनेगा जन्मदिन
आपको बता दें कि बलात्कार व हत्या के मामले में राम रहीम को 20 साल व उम्र कैद की सजा हुई है। राम रहीम हरियाणा प्रदेश की सुनारिया जेल में बंद है। सुनारिया जेल में उसको कैदी नंबर-8647 के नाम से जाना जाता है। बाबा राम रहीम का जन्मदिन 15 अगस्त को होता है। नियमों का पालन हुआ होता तो राम रहीम का जन्मदिन जेल में ही मनता। बृहस्पतिवार को पैरोल पर छूटने के कारण वह अपने बरनावा वाले डेरे में पहुंच चुका है। अब उसका जन्मदिन भव्य तरीके से बरनावा के आश्रम में मनाएंगे। राम रहीम के बार-बार पैरोल पर छूटने को लेकर अनेक सवाल उठाए जा रहे हैं।
क्या होती है पैरोल
भारतीय जेल मैनुअल में कारागार अधिनियम 1984 की धारा 59(5) के तहत किसी कैदी को पैरोल पर छोडऩे की व्यवस्था की गई है। पैरोल दो प्रकार का होता है। पहले प्रकार का पैरोल कस्टडी पैरोल अथवा इमरजेंसी पैरोल होता है। इस पैरोल में किसी कैदी के परिवार में किसी सदस्य की मौत हो जाने पर उस कैदी को पुलिस कस्टडी में जेल से बाहर भेजा जाता है। दूसरे प्रकार का पैरोल नियमित अथवा रेगुलर पैरोल होता है। इस पैरोल में कैदी को परिवार के किसी सदस्य की गंभीर बीमारी की स्थिति में, परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु हो जाने पर, कैदी के पुत्र या पुत्री के विवाह होने पर, कैदी की पत्नी को बच्चा होने पर, कोई अधूरा सरकारी काम पूरा करने के लिए, अपनी संपत्ति की वसीयत करने अथवा बेचने के लिए या फिर कैदी किसी ऐसे रोग से ग्रसित हो जिसका इलाज जेल की अस्पताल में संभव नहीं हो सकता तभी पैरोल पर जेल से बाहर भेजा जाता है। कुछ प्रदेशों में पैरोल के अलग-अलग नियम बनाए गए हैं। हरियाणा सरकार राम रहीम को बार-बार नियमित पैरोल पर छोड़ रही है। पैरोल के नियमों में से राम रहीम के पैरोल में एक भी नियम पूरा नहीं किया जा रहा है। यह मुददा हरियाणा में ही नहीं पूरे देश में बड़ी चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर बलात्कार व हत्या जैसे गंभीर आरोपों में उम्रकैद की सजा काट रहे राम रहीम को बार-बार पैरोल क्यों और कैसे मिल रही है।
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