कहां गया राणा का भाला
कहीं गयी घर लाठी बल्लम
कहां गयी बरछी तलवार ।
कहां गया राणा का भाला
पृथ्वीराज की कहां ललकार ।।
कहां गये वो कृष्ण के वंशज
कहां अर्जुन की धनु टंकार ।
कहां हमारे भीष्म पितामह,
कहां द्रोण का शस्त्र ज्ञान ।।
कहां गयी वह संस्कृति मेरी
कहां पुरा है ज्ञान विज्ञान ।
कहां गयी वह ज्योतिष गणना,
जहां छुपा था सकल जहान।।
हम न हारें, हरा दिया,
बाद देश के गद्दारों ने।
गौरवशाली अतीत था अपना,
मिटा दिया खुद्दारों ने ।।
जग जाओ हे वीर सपूतों
भारत मां का उद्धार करो ।
शीश काट कर अरिदल का
लहू से उनके श्रृंगार करो ।।
हिंदू हैं हम, हिंद के रक्षक
दुश्मन का मन तोड़ेंगे ।
अगर दिखाई आंख वतन को,
जिंदा नहीं हम छोड़ेंगे।
विश्व नाथ त्रिपाठी
३०-९-२३
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें