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लोकसभा चुनाव न लड़ना पड़े, मंत्री जुगत भिड़ा रहे , मेनका गांधी का टिकट कटेगा, राजकेश्वर सिंह सुलतानपुर से हो सकते हैं संभावित उम्मीदवार



आज की खबर
देव मणि शुक्ल 

 नोएडा उत्तर प्रदेश सरकार के कई मंत्री लोकसभा चुनाव मैदान में उतारे जा सकते हैं। ज्यादतर मंत्री इस बात से आशंकित है कि कहीं उन्हें लोकसभा चुनाव लड़ने को न कह दिया जाए। पार्टी भी तय कर चुकी है कि कई मंत्रियों और कुछ विधायकों को 2024 के लोकसभा चुनाव में उतरा जा सकता है।

विधायकों का तो लोकसभा चुनाव लड़ना फायदे का सौदा लग रहा है, लेकिन मंत्री चुनाव के चक्कर में पड़ना नहीं चाहते। वास्तव में इसके कई कारण है। उत्तर प्रदेश में वह मंत्री हैं और यहां सत्ता सुख भी मिल रहा है। लेकिन, यदि वह सांसद हो गए तो मंत्री बनेंगे या नहीं बनेंगे यह तय नहीं। ज्यादा संभावना यही है कि वह दिल्ली में मंत्री पद न पा सकें। 2019 के लोकसभा चुनाव में रीता बहुगुणा जोशी उत्तर प्रदेश की ताकतवर मंत्री थी। लेकिन, 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें चुनाव लड़ने का आदेश दिया। वह प्रयागराज से लोकसभा सीट के मैदान में उतरी और जीती भी, लेकिन वह मंत्री नहीं बन सकीं। वह पांच साल सांसद ही रहीं, लेकिन मंत्री नहीं बनाई गई। उल्टे उनके पीछे विवाद भी लगा।

सूत्रों के अनुसार भारतीय जनता पार्टी नेतृत्व उन सीटों का सर्वे करा रहा है जहां पर पार्टी की स्थिति ठीक नहीं है। यही नहीं इन सीटों के लिए संभावित प्रत्याशी का चयन भी किया जा रहा है। जिन सीटों पर वर्तमान सांसदो के प्रति असंतोष है उनके टिकट काटे जाएंगे। इसकी जगह मजबूत प्रत्याशियों को भी तलाश की जा रही है। जो नाम सामने आ रहे हैं, उनमें कई मंत्री और विधायक शामिल है। कुछ विधायक को स्वयं लोकसभा चुनाव लड़ना भी चाहते हैं ।

पता चला है कि सरोजिनी नगर के विधायक राजेश्वर सिंह  सुलतानपुर से चुनाव लड़ सकते हैं। साफ है कि यदि वह सुलतानपुर से चुनाव लड़े तो मेनका गांधी का टिकट कटेगा । यही नहीं वरुण गांधी भी इस बार बीजेपी के टिकट पीलीभीत से चुनाव मैदान में नही उतरेंगे। भाजपा नेतृत्व इस सीट पर किसी कुर्मी प्रत्याशी को मैदान में उतारेगा। इसी तरह लगभग 30 सीटे ऐसी है जहां वर्तमान सांसदों से लोग नाराज हैं इन सीटों पर बदलाव होगा।

सूत्रों के अनुसार दिसंबर के अंत तक जिन लोगों को चुनाव लड़ना है, उनको सचेत कर दिया जाएगा। फिलहाल मंत्री इसी कोशिश में लगे हैं कि किसी तरह चुनाव के झंझट में न पड़ना पड़े।

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