कथा के दूसरे दिन ध्रुव चरित्र का रोचक प्रसंग सुनाया




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देव मणि शुक्ल 

 नोएडा सेक्टर 31के निठारी गांव स्थित प्राचीन शिव मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथा व्यास निरंजन दास जी महाराज ने ध्रुव चरित्र का रोचक वर्णन किया। मनु और शतरूपा के दो पुत्र हुए और तीन पुत्रियां। पुत्रों के नाम प्रियव्रत और उत्तानपाद। राजा उत्तानपाद की दो रानियां हैं एक का नाम सुरुचि और दूसरी का नाम सुनीति है। राजा सुरुचि को अधिक प्यार करते हैं जिनके पुत्र का नाम उत्तम है और सुनीति के पुत्र का नाम ध्रुव है। बालक ध्रुव एक बार पिता की गोद में बैठने की जिद करने लगता है लेकिन सुरुचि उसे पिता की गोद में बैठने नहीं देती है। ध्रुव रोता हुआ मां सुनीति को सारी बात बताता है , मां की आंखों में आंसू आ जाते हैं और वह ध्रुव को भगवान की शरण में जाने को कहती हैं। पांच वर्ष का बालक ध्रुव राज्य छोड़कर वन में तपस्या के लिए चला जाता है। नारद जी रास्ते में मिलते हैं और ध्रुव को समझाते हैं कि मैं तुम्हें पिता की गोद में बैठाउँगा लेकिन ध्रुव ने कहा कि पिता की नहीं अब परम पिता की गोद में बैठना है। कठिन तपस्या से भगवान प्रसन्न हो वरदान देते हैं । आयोजन समिति के प्रवक्ता राघवेंद्र दुबे ने बताया कि 1 नवंबर दिन बुधवार को कथा के तीसरे दिन कृष्ण जन्मोत्सव आदि कथाओं का वर्णन किया जाएगा।
 इस अवसर पर आयोजन समिति के वेद प्रकाश शर्मा, अशोक अवाना, अर्जुन प्रजापति, करतार अवाना, विक्की शर्मा, बाली सिंह, आनंद ,पप्पू शर्मा,रामपाल सेन , आशाराम सेन, वाई डी शर्मा, रोहतास शर्मा, फतेह सेन,बालेश शर्मा, श्यामल शर्मा सहित तमाम भगवत्प्रेमी भक्त मौजूद रहे।

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