चारागाह समझकर विद्यालय को लूटने वाले को मिलेगा हर स्तर पर करारा जबाब - डॉ. अनूप पाण्डेय
आज की खबर
देव मणि शुक्ल
◆ सहायक रजिस्ट्रार के एकपक्षीय आदेश को माननीय उच्च न्यायालय में दी गई है चुनौती ।
◆ अस्तित्वविहीन कालातीत प्रबंध समिति के विरुद्ध हुई एकल संचालन की कार्यवाही बरकरार होने, व न्यायालय से राहत ना मिलने से विपक्षी बौखलाहट में
प्रतापगढ़ संस्था राजर्षि टण्डन इंटर कॉलेज रामनगर (अठगवां) प्रतापगढ़ के सम्बंध में सहायक रजिस्ट्रार फर्म्स सोसाइटीज एवं चिट्स प्रयागराज के आदेश दिनांक 01.01.2024 को, एक भ्रामक खबर के साथ सोशलमीडिया में कुछ लोगों द्वारा वायरल किया व कराया गया । जिसे संज्ञान में लेते हुए राजर्षि टण्डन इंटर कॉलेज रामनगर (अठगवां) के प्रबंधक डॉ. अनूप कुमार पाण्डेय ने सम्बंधित ख़बर को निराधार व तथ्यहीन करार दिया । उन्होंने इसे सस्ती लोकप्रियता हासिल करने का एक माध्यम बताया । अपने दिए गए एक बयान में उन्होंने कहा कि बिना सुनवाई की वैधानिक प्रक्रिया को पूर्ण किए, सहायक रजिस्ट्रार के त्रुटिपूर्ण आदेश दिनांक 01/01/2024 को माननीय उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है । प्रलोभन व दुराशय में किए गए इस त्रुटिपूर्ण आदेश के विरुद्ध मा. मुख्यमंत्री, वित्त मंत्री, अपर मुख्य सचिव वित्त, निदेशक लेखा एवं आंतरिक परीक्षा, रजिस्ट्रार फर्म्स सोसाइटीज एवं चिट्स, प्रमुख सचिव सतर्कता, पुलिस अधीक्षक सतर्कता से भी शिकायत की गई है, और उक्त आदेश को निरस्त करने व पुनः वैधानिक रूप से पैनल गठित कर मामले की सुनवाई करने का अनुरोध किया गया है । कार्यवाही प्रक्रिया गतिमान है । वर्तमान में प्रकरण माननीय उच्च न्यायालय में लंबित है । मामला विचाराधीन होने के बावजूद सोशलमीडिया में भ्रामक ख़बर प्रसारित कर लोगो को गुमराह करना पूर्णतः अविधिक व हास्यास्पद है । सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के उद्देश्य से कुछ लोगों द्वारा यह कुकृत्य किया गया, जो कि अत्यंत घृणित है । दरअसल सरस्वती मंदिर रूपी विद्यालय को निजी चारागाह समझकर अपने दोनों हाथों से संस्था को लूटने वाले की अब पोल खुल चुकी है । संस्था में अवैध नियुक्तियों के जरिए मोटी रकम डकारने, व कॉलेज को अपनी बपौती समझकर लूटने वाले की दुकान अब बंद हो चुकी है । इसी बौखलाहट में तमाम अनर्गल प्रलाप व कुकृत्य किया जा रहा है ।
प्रबंधक डॉ. अनूप कुमार पाण्डेय ने आरोप लगाया है कि सहायक रजिस्ट्रार का आदेश दिनांक 01/01/2024, एकपक्षीय आदेश है । फ़र्ज़ी कागजात के आधार पर दिनांक 15.03.2023 को हासिल किए गए नवीनीकरण प्रमाण पत्र को निरस्त करने का प्रार्थना पत्र, मातृसंस्था के आजीवन सदस्य श्री पारस नाथ पाण्डेय व श्री रमेश चन्द्र सिंह ने दिया था । लेकिन सहायक रजिस्ट्रार ने शिकायतकर्ता की आपत्ति का निस्तारण किए बगैर आदेश जारी कर दिया, जो कि नियमविरुद्ध व एक पक्षीय है ।
फ़र्ज़ी कागजात व तथ्यगोपन के आधार पर जिन सदस्यों की सदस्यता को वैधानिक करार दिया गया है वो पूरी तरह से असंवैधानिक व संस्था की नियमावली के विरुद्ध है । नियमावली में वर्णित व्यवस्था के विरुद्ध जाकर सदस्यता दी गई है । मूल अभिलेखों के सम्बंध में दिए गए निर्णय के सम्बंध में डॉ. अनूप कुमार पांडेय ने कहा कि सहायक रजिस्ट्रार ने स्पष्ट उल्लेख किया है कि किसी पक्षकार द्वारा मूल अभिलेख नहीं प्रस्तुत किया गया है, बावजूद इसके अपने आदेश में विपक्षी द्वारा 04. 10. 2023 को मूल अभिलेख जमा करना दर्शाया गया है । जबकि पक्षकार श्री कृपा शंकर पाण्डेय ने अपने पत्र दिनांक 01/09/2023 के माध्यम से मूल अभिलेख की प्रामाणिक प्रति की मांग की थी । लेकिन उन्हें मूल अभिलेख की प्रामाणिक प्रति उपलब्ध नहीं कराया गया । सहायक रजिस्ट्रार के आदेश पर यदि गौर किया जाय तो यह एक न्यायपीठ का आदेश ना होकर, एक पक्षकार की भांति आदेश जारी किया गया है । इसलिए इस आदेश को माननीय उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है । जनपद में यह सर्वविदित है कि राजर्षि टण्डन इंटर कॉलेज किसका है । किसने विद्यालय को स्थापित किया । किसने अपने खून पसीने से सींचकर विद्यालय को संचालित किया, यह सभी को पता है । विद्यालय को लूटकर बर्बाद करने वाले की असलियत अब खुल चुकी है, उसके चेहरे से अब नकाब उतर चुका है । न्याय व्यवस्था पर हम गहरी आस्था रखते हैं । इस मामले न्याय जरूर होगा, और विद्यालय लूटने वाले को हर स्तर पर करारा जबाब मिलेगा ।
गौररतलब है कि डीआईओएस प्रतापगढ़ ने अपने आदेश दिनांक 06/09/2023 को अस्तित्वविहीन कालातीत प्रबंध समिति के विरुद्ध बड़ी कार्यवाही करते हुए एकल संचालन कर दिया, और वित्त लेखाधिकारी को प्राधिकृत नियंत्रक नियुक्त किया । अपने आदेश में डीआईओएस प्रतापगढ़ ने स्पष्ट लिखा है कि मई 2021 में प्रबंध समिति कालातीत हो चुकी है । कोई भी वैधानिक चुनाव की प्रक्रिया नहीं सम्पन्न हुई । डीआईओएस प्रतापगढ़ के इस आदेश के विरुद्ध विपक्षी ने माननीय उच्च न्यायालय लखनऊ में याचिका दाखिल की । जिसमें डीआईओएस प्रतापगढ़ ने काउंटर दाख़िल कर, कार्यवाही की जद में आयी कालातीत प्रबंध समिति को अवैध करार दिया है । यह प्रकरण भी अभी माननीय उच्च न्यायालय में विचाराधीन है ।
ऐसा प्रतीत होता है कि आपके द्वारा प्रयागराज में किये गए तमाशे या पैसे का कोई प्रभाव हुआ नहीं। ख़ैर अब जो दिया गया है वो तो वापस आने वाला नहीं जो कुछ और है वह भी स्वाहा कर दीजिए किंचित तभी आपको आपके पापों से मुक्ति मिलेगी।
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