साधना पथ 155


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देव मणि शुक्ल 

हनुमानजी बाल ब्रह्मचारी माने जाते हैं परंतु ब्रह्मचारी होते हुए भी हनुमानजी ने देवी सुवर्चला से विवाह किया था जिसकी एक रोचक कथा है..
सूर्यदेव हनुमानजी के गुरु थें, हनुमानजी ने संपुर्ण विद्या उन्ही से प्राप्त की थीं, विद्या प्रदान करते समय सूर्यदेव के सामने धर्मसंकट आन पड़ा था, कुल 9 तरह की विद्या में 5 विद्या हनुमानजी ग्रहण कर चुके थे व बची हुई 4 विद्या हेतु हनुमानजी को विवाहित होना अनिवार्य था।
हनुमान जी पूरी शिक्षा लेने का प्रण कर चुके थे, ऐसी स्थिति में सूर्यदेव ने हनुमान जी को विवाह की सलाह दी कि वे उनकी पुत्री सुवर्चला से विवाह कर विद्या ग्रहण कर सकते हैं एवम अपना ब्रह्मचार्य का पालन भी कर सकते हैं, हनुमानजी विवाह हेतु तैयार हो जाते हैं।
सूर्यदेव ने अपनी परम तपस्वी और तेजस्वी पुत्री सुवर्चला को हनुमानजी के साथ शादी के लिए तैयार कर लिया। विवाह पश्चात हनुमानजी ने अपनी शिक्षा पूर्ण की और विवाह उपरांत सुवर्चला सदा के लिए अपनी तपस्या में रत हो गई। तेलंगाना के खम्मम जिले में एक मंदिर बना है जहां पर हनुमानजी की प्रतिमा उनकी पत्नी सुवर्चला के साथ विराजमान हैं, बहुत कम लोग इस मंदिर के बारे में जानते होंगे। यहां पर हनुमानजी के उनकी पत्नी के साथ दर्शन करने के लिए दूर दूर से लोग आते हैं। पराशर संहिता में हनुमान जी के विवाह का उल्लेख है, वाल्मीकि‌ रामायण और रामचरित मानस में बालाजी हनुमानजी के इसी रूप का वर्णन मिलता है, जहाँ हनुमानजी विवाहित होते हुए भी ब्रह्मचारी माने जाते हैं।

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