देश, प्रेम, समर्पण, और एकता का प्रतीक है स्वतंत्रता दिवस- बीके शर्मा हनुमान
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देव मणि शुक्ल
नोएडा गाजियाबाद विश्व ब्रह्मऋषि ब्राह्मण महासभा/प्राइवेट चिकित्सक वेलफेयर एसोसिएशन के तत्वधान में आज 78 व स्वतंत्रता दिवस बड़ी धूमधाम से मनाया गया विश्व ब्रह्मऋषि ब्राह्मण महासभा के पीठाधीश्वर ब्रह्मऋषि विभूति बीके शर्मा हनुमान ने बताया कि 15 अगस्त यानि भारतीय स्वतंत्रता दिवस देश के इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण दिनों में से एक है। 15 अगस्त 2024 को ब्रिटिश कोलोनियल राज से हमारे देश की आजादी की 78 वीं वर्षगांठ है।भारत को 1947 में आजादी मिल गई थी लेकिन इस आजादी की लड़ाई कई वर्षों लंबी और कठिन थी. स्वतंत्रता की इस लड़ाई का नेतृत्व प्रख्यात नेताओं और स्वतंत्रता सेनानियों ने किया। खून पसीना बहाकर, अपने भविष्य का निःस्वार्थ त्याग कर, अपने जीवन का बलिदान दिया और करोड़ों भारतीयों को ब्रिटिश उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया। स्वतंत्रता दिवस हमारे पूर्वजों के इन बलिदानों की याद दिलाता है। यह हमें अपनी स्वतंत्रता को संजोने और राष्ट्र की भलाई के लिए काम करने की प्रेरणा देता है। स्वतंत्रता दिवस समारोह से हमें विविधता में एकता की याद दिलाने के लिए है। यह राष्ट्रवाद की भावना को फिर से जगाने और हमारे देश की वृद्धि और विकास में योगदान देने का समय है।यह ऐतिहासिक दिन है और हमारे देशवासियों के बीच देशप्रेम, समर्पण और एकता का प्रतीक है। स्वतंत्रता दिवस का दिन देश में राष्ट्रीय अवकाश के तौर पर मनाया जाता है। इस दिन भारत के उन महान स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दी जाती है जिनके त्याग और बलिदान के चलते भारत तो अंग्रेजी हुकूमत से आजादी मिली थी। आज का दिन इनकी बहादुरी, वीरता और शौर्य को नमन करने का दिन है। देश के इन स्वतंत्रता सेनानियों ने आजादी को पाने के लिए हमने लंबा संघर्ष किया। अपना पूरा जीवन, पूरी जवानी आजादी को पाने में झोंक दी। देश को आजाद कराने में महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह, मंगल पाण्डे, चंद्रशेखर आजाद, राजगुरु, सुखदेव, सरदार वल्लभभाई पटेल, लाला लाजपत राय, जवाहरलाल नेहरु लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता सेनानियों का अहम योगदान रहा।लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक जैसे कई क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता सेनानियों का अहम योगदान रहा। भारत मां के इन सच्चे सपूतों के लंबे संघर्ष के कारण स्वतंत्रता का सपना साकार हुआ। आज 15 अगस्त, 1947 का जिक्र होते ही गर्व से हर भारतीय का सीना चौड़ा हो उठता है।
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