नेकी मैन ऑफ इंडिया" — इंसानियत और सेवा को समर्पित एक नाम- गिरीश चंद्र शुक्ला



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देव मणि शुक्ल 

 नोएडा नई दिल्ली में आयोजित एक साहित्य-सामाजिक संगोष्ठी उस क्षण विशेष बन गई जब प्रख्यात लेखिका सपना जैन ने समाजसेवी गिरीश चंद्र शुक्ला को "नेकी मैन ऑफ इंडिया" की उपाधि से संबोधित किया। यह नामकरण केवल एक सम्मान नहीं, बल्कि उन हज़ारों ज़रूरतमंदों की ओर से कृतज्ञता की गूंज है, जिनके जीवन को नेकी का डब्बा फाउंडेशन ने प्रेम और सेवा से छुआ है।

गिरीश चंद्र शुक्ला, जिन्होंने बीते वर्षों में समाज सेवा को जीवन का ध्येय बनाया, आज इसी नई उपाधि के साथ जनमानस में एक नई पहचान की ओर अग्रसर हैं। उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि अगर इरादे नेक हों, तो अकेला व्यक्ति भी परिवर्तन की मिसाल बन सकता है।

उनके नेतृत्व में कार्यरत नेकी का डब्बा फाउंडेशन न केवल जनकल्याण के कार्यों में संलग्न है, बल्कि संवेदनशीलता, करुणा और मानवीय मूल्यों के पुनर्प्रतिष्ठापन का भी माध्यम बन रहा है।

फाउंडेशन की नौ प्रमुख मानवीय पहलें समाज के विभिन्न स्तरों को छूती हैं:

1. "आपकी उतरन, किसी की ज़रूरत": पुराने कपड़े, खिलौने, जूते और बैग एकत्र कर ज़रूरतमंदों तक पहुँचाने की अभिनव पहल।

2. "नेकी का दोना-पत्तल": झुग्गी-बस्तियों और सड़क किनारे रहने वालों को गर्म, ताज़ा और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने की सेवा।

3. "नेकी की पाठशाला": फुटपाथ और बस्तियों में रहने वाले बच्चों को शिक्षा से जोड़ने का प्रयास, जिससे उनका भविष्य उज्जवल हो सके।

4. "नेकी की दवा": निर्धन, वृद्ध एवं बीमार नागरिकों को निःशुल्क OPD एवम् दवा वितरण की योजना, जो उनके लिए जीवनदायिनी बन रही है।

5. "मूर्ति विसर्जन एवं पर्यावरण संरक्षण": धार्मिक विश्वास और पर्यावरणीय जिम्मेदारी का संतुलन रखते हुए ऐसे मूर्तियों का सुरक्षित विसर्जन करना जिसे लोग पूजा के बाद सड़क किनारे पेड़ो के नीचे छोड़ देते है।

6. "ब्लड बैंक ऑफ नेकी": रक्तदान नेटवर्क के माध्यम से आपातकालीन स्थितियों में जीवन की रक्षा का उत्तरदायित्व।

7. "गौ-जीवन": घायल एवं बेसहारा गायों की देखभाल, उपचार और सुरक्षा के लिए समर्पित एक भावनात्मक पहल।

8. "बुक बैंक ऑफ नेकी": दान में मिली किताबों से जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए पुस्तकालय निर्माण और शैक्षिक सहायता।

9. "वृक्षमित्र": पौधारोपण और पर्यावरण संरक्षण हेतु जनभागीदारी को बढ़ावा देने वाला अभियान।

इन पहलों की सफलता केवल सेवा की भावना से नहीं, बल्कि एक सुव्यवस्थित दृष्टिकोण, समुदाय आधारित सहभागिता और निरंतर जागरूकता अभियानों के माध्यम से संभव हुई है।
सपना जैन ने अपने संबोधन में कहा, “गिरीश शुक्ला जैसे लोग भारत की आत्मा हैं, जो बिना किसी शोर के असली क्रांति ला रहे हैं। उनके प्रयासों को देखते हुए उन्हें ‘नेकी मैन ऑफ इंडिया’ कहना एक सौभाग्य है, क्योंकि वे वास्तव में पूरे देश के लिए प्रेरणा हैं।”
गिरीश शुक्ला का मानना है — “नेकी को आदत और आदत को आंदोलन बनाना ही मेरा लक्ष्य है।”
आज "नेकी मैन ऑफ इंडिया" केवल एक उपाधि नहीं, बल्कि समाज के प्रति उनके निःस्वार्थ समर्पण और सकारात्मक दृष्टिकोण का प्रमाण बन चुका है। उनका जीवन उन सभी के लिए प्रेरणास्त्रोत है, जो मानते हैं कि समाज की भलाई सिर्फ सरकार या संस्थाओं का काम नहीं, बल्कि हर जागरूक नागरिक की ज़िम्मेदारी है।

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