अगर वाकई ऐसा हो गया तो वर्ल्ड ऑर्डर पूरी तरह से बदल जाएगा


आज की खबर 
देव मणि शुक्ल 

अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप को ब्रिक्स से बहुत डर लगता है। लेकिन ब्रिक्स नहीं अमेरिका के लिए RICH से निपटना ही मुश्किल पड़ जाएगा.! आज आप लोग भी समझिए नया संभावित गठबंधन RICH जिसका शाब्दिक अर्थ ही अमीरी और संपन्नता है। कैसे बनेगा और कितना मजबूत होगा. जब R फॉर रशिया. I फॉर इंडिया और CH फॉर चाइना मिलेंगे तो RICH का ही निर्माण होगा. इस वक्त आप उस संभावित गठबंधन RICH की एक तरफ हैं, और जिसका इशारा रूस की तरफ से मिल चुके है। इससे पहले भी रूस ने, भारत, चीन और रूस के एक साथ आने की अपील कर चुका है. लेकिन अब डॉनल्ड ट्रंप ने जो परिस्थितियां दुनिया में पैदा कर दिया हैं...! यह गठबंधन एक स्वाभाविक गठबंधन भी बनने जा रहा है या बन सकता है।

मित्रों, अब चलिए समझते हैं कि अगर रूस, चीन और भारत एक साथ आते हैं तो.! कैसे अमेरिका के वर्चस्व को चुनौती दे सकते हैं। अमेरिका विश्व का सबसे बड़ा अमीर मुल्क है..! जिसकी GDP लगभग 28 ट्रिलियन डॉलर है। जबकि चाइना की GDP 18.74 ट्रिलियन डॉलर, भारत की GDP 4.01 ट्रिलियन डॉलर है और रसिया की GDP 2.17 ट्रिलियन डॉलर है.. इन तीनों देशों की संयुक्त GDP अमेरिका के काफी करीब यानि 24.35 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच जाती है। परंतू इसमें आबादी यानि बाजार के मामले में ये तीनों देश मिलकर अमेरिका से काफी आगे हैं। भारत, चीन और रूस की आबादी मिलाकर लगभग 3 अरब है.. यानि कि दुनिया की 37% आबादी इन तीन देशों में ही रहते हैं. और अमेरिका की आबादी दुनिया की 4% है यानि सिर्फ 33 करोड़ है.. और यह बात ट्रंप को भी पता है। इतने बड़े बाजार से अगर अमेरिका बाहर हो गया तो उसकी कमर टूट जाएगी।

इस बात को मान लेना कोई तकलीफ की बात नहीं है कि, USA विश्व की सुपर पावर यानि सबसे ताकतवर देश है..! लेकिन इसके बाद चीन, रूस और भारत का नंबर आता है। तीन देशों की संयुक्त सेना 48 लाख से ज्यादा है। जबकि अमेरिका की सैनिक सिर्फ 13 लाख है। अगर अमेरिका की अगुवाई वाले नाटो गठबंधन के देशों को भी मिला लें तो सैनिकों की संख्या चीन, रूस और भारत से बहुत ही ज्यादा कम है। सबसे विनाशक परमाणु हथियारों की बात करें तो तीन देशों के RICH गठबंधन के पास इनकी संख्या 6800 है, जब​ USA 5200 परमाणु हथियारों से लैस हैं.. वहीं अगर USA दुनिया में हथियारों का सबसे बड़ा उत्पादक है. चाइना रूस और भारत में भी दुनिया के बड़े बड़े हथियारों की फैक्ट्री हैं.. भारत भी तेजी से रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन रहा है। यानि कि आसमान एवं ज़मीन और समंदर में तीन देशों का गठबंधन अमेरिका की अगुवाई वाले गठबंधन NATO को कड़ी टक्कर देगा. हो सकता है अमेरिका एवं उसके सहयोगियों पर भारी भी पड़ जाए लेकिन महाशक्तियों का सैन्य टकराव दुनिया को खत्म कर सकता है.. तो इस बात की बहुत ज्यादा आशंका है कि, दोनों गुटों के बीच आर्थिक एवं कूटनीतिक युद्ध ज्यादा होगा। तो आप लोगों को ये बात भी जान लेना चाहिए कि, संसाधनों के मामले में भी रूस, चीन और भारत अपनी जरूरत का 90 प्रतिशत सामान बिना किसी मदद के तैयार कर सकते हैं। जबकि अमेरिका ऐसा नहीं कर पाएगा. ऊर्जा क्षेत्र की बात करें तो रूस में तेल, गैस और कोयला का बहुत बड़ा भंडार मौजूद है। और रूस दुनिया का सबसे बड़ा तेल निर्यातक है। वहीं भारत भी परमाणु ऊर्जा क्षमता और सौर ऊर्जा में आगे है। जबकि चीन सौर पैनल, विंड टर्बाइन निर्माण का वैश्विक नेता है। संसाधनों की बात करें तो रूस में टाइटेनियम, निकल, कोबाल्ट, यूरेनियम बड़ी मात्रा में मिलता है, और वहीं चीन में 60% से ज्यादा रेयर अर्थ मेटल का उत्पादन होता है। वहीं भारत में बॉक्साइट, लौह अयस्क, ग्रेफाइट और मैंगनीज की खानें हैं. रेयर अर्थ की भी बहुत बड़ी स्टॉक है।
 
खाद्य सुरक्षा और कृषि की बात करें तो, भारत दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध, दाल, चावल का उत्पादक देश है। वहीं रूस दुनिया का सबसे बड़ा गेहूं निर्यातक देश है। और चीन भी कृषि मशीनरी और खाद्यान्न उत्पादन में सक्षम है। यानि ये तीनों देश मिल जाएं तो इन्हें दुनिया में किसी की जरूरत नहीं है. अब आप सभी मित्रों को विदेश मामलों पर जानकारी समझनी चाहिए. भारत, चाइना और रूस के बीच संभावित गठबंधन हुआ तो अमेरिका को कितना भारी पड़ सकता है. ये भी बहुत बड़ी सच्चाई है कि भारत और चाइना में अविश्वास की बहुत बड़ी खाई है। लेकिन कुछ दिनों पहले भारत के NSA अजित डोवल साहब और फिर विदेश मंत्री भी चीन गए थे. यानि डॉनल्ड ट्रंप की वजह से अविश्वास की खाई धीरे-धीरे भर भी सकती है. लेकिन फिर भी हमें हर बात पर फूंक फूंक कर रखनी चाहिए, क्योंकि चीन हमारे लिए अविश्वास से भरा एक विश्वास घाती देश है. लेकिन हां...! परिस्थिती भी हर मोड़ को बदल देती है..! वैश्विक राजनीति में कोई किसी का सगा या फिर दुश्मन नहीं होता है.. चाइना और भारत के बीच बॉर्डर के मसले पर, बातचीत तेज गति से चल रही है और इस पर रूस अपनी पैनी नज़र भी रख रही है. ये भी हो सकता है कि...!! वर्ल्ड ऑर्डर बदलने का एक संकेत के रूप में इतिहास अपना करवट ले रही है।

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