ध्रुव की समर्पित गुरु भक्ति , समर्पण व विश्वास ने उन्हें श्रेष्ठतम स्थान प्राप्त करा दिया -आचार्य प्रदीप


आज की खबर 
विश्व नाथ त्रिपाठी 

प्रतापगढ़। ध्रुव की समर्पित गुरु भक्ति, समर्पण एवं विश्वास ने श्रेष्ठतम स्थान दिला दिया,यह बात ब्लाक बिहार  के सिया चंदई का पूरा में भारत तिवारी के यहां चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन की कथा में व्यासपीठ पर विराजमान आचार्य प्रदीप जी ने कही।
      व्यास जी ने ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए बताया कि विमाता सुरुचि के दुर्भावना पूर्ण व्यवहार ने ध्रुव के जीवन की दिशा ही बदल दिया।  जब सुरुचि ने पिता की गोद से दुत्कार कर उतार दिया ,बालक को बड़ा दुख हुआ ।दुखी मन से रोता हुआ बालक अपनी मां सुनीति से सब कुछ बताया मां ने कहा बेटा जगत पति की गोद में बैठना तुम्हारे भाग्य में लिखा है । ध्रुव को मां सुनीति ने परमात्मा के विषय में बताया । ध्रुव वन की ओर चल दिया परमपिता परमात्मा से मिलने ।निडर भाव से बालक ध्रुव वन में चला जा रहा था ।मार्ग में नारद जी मिले और ध्रुव से कुछ प्रश्नों का उत्तर मांगा । ध्रुव ने बडे ही धैर्य से उत्तर दिया।नारद जी बालक की क्षमता को पहचान कर द्वादस मंत्र  का उपदेश दिया। बालक दृढ़तापूर्वक मंत्र जपने लगा एक समय ऐसा आया जब नारायण को स्वयं आना पड़ा ।
     भगवान नारायण ने ध्रुव से वर मांगने को कहा लेकिन गुरू जी के अभाव में कुछ नहीं। बोले अंत में नारद जी आकर ध्रुव का परिचय नारायण से क्या कर उन्हें परमपद का अधिकारी बना दिया आज ध्रुव महाराज जी आकाश में उत्तर दिशा में नित्य विराजमान हैं ।हजारों वर्ष इस धरती पर राज करने के बाद वैकुंठ लोक को प्राप्त हुए। जो भी गुरुशरण ग्रहण कर विश्वास के साथ दृढ़तापूर्वक समर्पडण भाव से भगवान का भजन करें तो अदृश्य भगवान को दृष्टिगत कर सकता है ।इसके बाद भक्त प्रह्लाद का प्रकरण सुनाते हुए नारायण की महिमा का वर्णन किया।
 कथा श्रवण में क्षेत्र के प्रतिष्ठित लोगों के अलावा भारी संख्या में लोग उपस्थित रहे।कथा का आयोजन रामायण व श्रीमती मंजू तिवारी ने चारों धाम की धार्मिक के यात्रा के बाद अपने पूर्वजों को चिर शांति के लिए किया।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

बी डी इंटरनेशनल स्कूल में दसवीं के छात्रों की विदाई समारोह सम्पन्न

यमुना नदी डूब क्षेत्र के जरूरतमंदों के लिए नेकी का डब्बा फाउंडेशन का सहयोगी अभियान सफल

पाकेट 7 सेक्टर 82 में कुत्तों का आतंक