मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग का महत्व
देव मणि शुक्ल
आज की खबर
मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है, जो आंध्र प्रदेश के कृष्णा नदी के तट पर श्रीशैलम में स्थित है। इस ज्योतिर्लिंग का नाम मल्लिकार्जुन है, जो भगवान शिव के एक रूप हैं।
मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग का इतिहास पुराणों में वर्णित है, जिसके अनुसार यह स्थान भगवान शिव और माता पार्वती की पुत्री अशोक सुंदरी की तपस्या स्थली है। इस ज्योतिर्लिंग की स्थापना भगवान शिव ने स्वयं की थी, और यह ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए थे।
मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के बारे में कई पौराणिक कथाएं हैं। एक कथा के अनुसार, भगवान शिव और माता पार्वती के दो पुत्र हैं - भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय। एक बार दोनों भाइयों में यह विवाद हो गया कि कौन बड़ा है। इस विवाद को सुलझाने के लिए, भगवान शिव ने अपने दोनों पुत्रों को विश्व का चक्कर लगाने के लिए कहा। जो पहले वापस आएगा, वही बड़ा माना जाएगा।
भगवान कार्तिकेय अपने वाहन मोर पर बैठकर विश्व का चक्कर लगाने के लिए निकल पड़े। लेकिन भगवान गणेश ने अपने माता-पिता की परिक्रमा की और कहा कि माता-पिता ही पुत्र के लिए देवता हैं। भगवान शिव ने गणेश जी को आशीर्वाद दिया और उन्हें बड़ा घोषित किया।
इस विवाद के कारण भगवान कार्तिकेय को क्रोध आ गया और वह अपने पिता के पास से श्रीशैलम चले गए। भगवान शिव ने उन्हें शांत करने के लिए मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए और उन्हें आशीर्वाद दिया।
मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग की पूजा और महत्व बहुत अधिक है। यह ज्योतिर्लिंग भगवान शिव की शक्ति और कृपा का प्रतीक है। जो भक्त इस ज्योतिर्लिंग की पूजा करते हैं, उन्हें भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है और उनके जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।
मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने से भक्तों को आत्मशांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह ज्योतिर्लिंग भगवान शिव की भक्ति और शक्ति का प्रतीक है, और इसकी पूजा करने से भक्तों को विशेष फल प्राप्त होता है।
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