27 जुलाई से नोएडा स्टेडियम में स्वामी रामभद्राचार्य की रामकथा


पंडाल में टेंट लगना शुरू, इतने हजार भक्तों की बैठने की होगी व्यवस्था

आज की खबर

देव मणि शुक्ल 

नोएडा श्री रामराज फाउंडेशन और हनुमान सेवा न्यास की ओर से सेक्टर-21ए नोएडा स्टेडियम में रामकथा का आयोजन किया जाएगा। इस कथा का वाचन प्रख्यात पद्मविभूषण जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य करेंगे। यह रामकथा शहर में 9 दिन तक चलेगी। इसकी जानकारी श्री रामराज फाउंडेशन और हनुमान सेवा न्यास की ओर से मीडिया प्रेस वार्ता के दौरान दी गई है।
श्री रामराज फाउंडेशन ट्रस्ट के सदस्य अमित चौधरी ने बताया कि राम कथा को सुनने के लिए प्रतिदिन 20 हजार से अधिक भक्त नोएडा स्टेडियम में पहुंचेंगे। नोएडा स्टेडियम में पंडाल लगना शुरू हो गया है। पंडाल 500 मीटर लंबा और 100 मीटर चौड़ा बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि रामकथा को सुनने आने वाले किसी भी राज्य के श्रद्धालुओं को परेशान होने की जरूरत नहीं है। संस्था की तरफ से उनकी रुकने की व्यवस्था की जाएगी। वहीं सुरक्षा के मध्य नजर पंडाल के आसपास सीसीटीवी कैमरे लगवाए जाएंगे। पंडाल के अंदर महिलाओं के लिए और पुरुषों के लिए अलग बैठने की व्यवस्था होगी।


इस कार्यक्रम के मीडिया संयोजक अवनीश सिंह ने प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य नोएडा में राम कथा भक्तों को सुनाएंगे। राम कथा नोएडा स्टेडियम में आयोजित होगी। जो 27 जुलाई से शुरू होकर 4 अगस्त तक चलेगी। इसका समय हर दिन दोपहर 3 बजे से शुरू होकर शाम 7 बजे तक होगा। 
रामभद्राचार्य का नाम हिंदू संत समाज में काफी आदर के साथ लिया जाता है। यह सम्मान उन्होंने अपनी विशेष काबिलियत से हासिल किया है। सुप्रीम कोर्ट में राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद में उनकी गवाही सुर्खियां बनी थीं। वेद-पुराणों के उद्धरणों के साथ उनकी गवाही का कोर्ट भी कायल हो गया था। श्रीराम जन्मभूमि के पक्ष में वे वादी के तौर पर उपस्थित हुए थे। ऋग्वेद की जैमिनीय संहिता से उन्होंने उद्धरण दिया था। इसमें सरयू नदी के स्थान विशेष दिशा और दूरी का बिल्कुल सटीक ब्योरा देते हुए रामभद्राचार्य ने श्रीराम जन्मभूमि की स्थिति बताई थी।
कोर्ट में इसके बाद जैमिनीय संहिता मंगाई गई। उसमें जगद्गुरु ने जिन उद्धरणों का जिक्र किया था, उसे खोलकर देखा गया। सभी विवरण सही पाए गए। पाया गया कि जिस स्थान पर श्रीराम जन्मभूमि की स्थिति बताई गई, विवादित स्थल ठीक उसी स्थान पर पाया गया। जगद्गुरु के बयान ने फैसले का रुख मोड़ दिया। सुनवाई करने वाले जस्टिस ने भी इसे भारतीय प्रज्ञा का चमत्कार माना। एक व्यक्ति जो देख नहीं सकते, कैसे वेदों और शास्त्रों के विशाल संसार से उद्धहरण दे सकते हैं, इसे ईश्वरीय शक्ति ही मानी जाती है।

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